सीखें › ट्रैक 01 · बुनियादी बातें
1970 से LA28 तक
इस स्पर्धा के इतिहास के ज़्यादातर हिस्से में टॉप मैच पिस्टल स्प्रिंग वाली होती थीं। ट्रिगर दबाते ही पिस्टल के अंदर एक भारी पिस्टन ज़ोर से आगे जाकर टकराता है। उसके बाद ही पेलेट चलना शुरू होता है। कोई भी तारीख पढ़ने से पहले सोचें कि निशानेबाज़ के रूप में आपके लिए इसका क्या मतलब है।
पहले सोचें: स्प्रिंग पिस्टल में पेलेट के बैरल से निकलने से पहले ही पिस्टन चलकर रुक जाता है। इसका शॉट पर क्या असर होता है?
- कुछ नहीं — पेलेट अभी निकला ही नहीं, तो उस पर असर नहीं पड़ सकता
- पेलेट के बैरल में रहते हुए ही पिस्टल हिलने लगती है, इसलिए होल्ड या फ़ॉलो-थ्रू में कोई भी ढील टारगेट पर दिखती है
- इससे पेलेट ज़्यादा तेज़ और सीधी लाइन में जाता है
चैंपियनशिप से ओलंपिक स्पर्धा तक
10 मीटर एयर पिस्टल ज़्यादातर शूटिंग स्पर्धाओं से नई है। यह विश्व चैंपियनशिप से शुरू हुई, ओलंपिक तक पहुँचने में इसे दशकों लगे, और तब से इसका फ़ॉर्मेट कई बार बदल चुका है।
- 1970 — विश्व चैंपियनशिप में पुरुष स्पर्धा — 10 मीटर एयर पिस्टल का पहला विश्व खिताब।
- 1974 — विश्व चैंपियनशिप में महिला स्पर्धा — कई सालों तक महिलाएँ छोटा मैच शूट करती थीं। अब दोनों 60 शॉट शूट करते हैं।
- 1985 — फ़ाइनल की शुरुआत — इससे पहले फ़ाइनल नहीं होते थे। सिर्फ़ क्वालिफ़िकेशन का कुल स्कोर पदक तय करता था।
- 1988 — सोल में ओलंपिक में पहली बार — पुरुष और महिला, दोनों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धाएँ ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल होती हैं।
- 2013 — फ़ाइनल शून्य से शुरू — क्वालिफ़िकेशन का स्कोर अब फ़ाइनल के स्कोर में नहीं जोड़ा जाता।
- 2020 — ओलंपिक में मिक्स्ड टीम — टोक्यो 2020 में मिक्स्ड टीम स्पर्धा जुड़ती है। पहला खिताब चीन जीतता है।
- 2024 — पेरिस: आमने-सामने के पदक मैच — मिक्स्ड टीम के पदक 16 अंक तक के मैचों में तय होते हैं। सर्बिया स्वर्ण पदक जीतता है।
- 2026 — मिक्स्ड टीम का नया फ़ॉर्मेट — चार टीमों का एक फ़ाइनल, हर खिलाड़ी के 24 शॉट, दशमलव स्कोरिंग में। दोहा की विश्व चैंपियनशिप से LA28 का क्वालिफ़िकेशन शुरू होता है।
- 2028 — LA28 — LA28 · 14–30 जुलाई 2028। 10 मीटर एयर पिस्टल में हर वर्ग (पुरुष और महिला) के लिए 29 स्थान। व्यक्तिगत फ़ाइनल का फ़ॉर्मेट वही रहता है।
शून्य से शुरू होने वाला फ़ाइनल
2013 तक आपका क्वालिफ़िकेशन स्कोर फ़ाइनल स्कोर में जोड़ा जाता था। सुबह की बड़ी बढ़त आपको पदक तक ले जा सकती थी। फिर नियम बदले, और अब आठों फ़ाइनलिस्ट शून्य से शुरू करते हैं।
पहले सोचें: जब फ़ाइनल शून्य से शुरू होने लगे, तो किस फ़ाइनलिस्ट को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ?
- टॉप क्वालिफ़ायर
- 8वें स्थान का क्वालिफ़ायर
- किसी को नहीं — सबसे अच्छा निशानेबाज़ फिर भी जीतता है
इस बदलाव ने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग का तरीका बदल दिया। क्वालिफ़िकेशन फ़ाइनल में जाने का टिकट बन गया। फ़ाइनल अपने-आप में एक अलग हुनर बन गया: कमांड पर एक-एक शॉट फ़ायर करना, एलिमिनेशन के दबाव में, लाइव दिखते स्कोर के साथ।
पेलेट को ताकत देने के चार तरीके
सिर्फ़ नियम ही नहीं, पिस्टल भी उतनी ही बदलीं। हर नए पावर सिस्टम ने पिछले वाले की एक कमज़ोरी दूर की।
स्प्रिंग-पिस्टन। Feinwerkbau 65 (1965–97) में पिस्टन के झटके को खत्म करने के लिए फिसलने वाला एक “स्लेज” लगा था। यह एक बुनियादी समस्या का चतुर हल था: पेलेट निकलने से पहले भारी हिस्सों का हिलना।
CO2। 1982 से गैस पिस्टल ने भारी पिस्टन हटा दिया। पर CO2 का प्रेशर तापमान पर निर्भर करता है। गर्म हॉल में पेलेट तेज़ चलते हैं, और जल्दी-जल्दी शूट करने से गैस ठंडी होकर उन्हें धीमा कर देती है।
सिंगल-स्ट्रोक न्यूमैटिक। 1988 से FWB 100 सीरीज़ जैसी पिस्टल में हर शॉट से पहले लीवर का एक स्ट्रोक ताज़ी हवा का एक चार्ज दबाकर भरता था। यह स्थिर था और तापमान का असर नहीं पड़ता था, पर हर शॉट के लिए पंप करना पड़ता था।
पहले सोचें: स्प्रिंग पेलेट निकलने से पहले हिलती है। CO2 तापमान के साथ बदलती है। सिंगल-स्ट्रोक में हर शॉट पर पंप करना पड़ता है। कौन-सा डिज़ाइन तीनों समस्याएँ दूर करता है?
- हल्की स्प्रिंग और नरम पिस्टन
- बड़ा CO2 कार्ट्रिज
- हाई प्रेशर पर भरी हवा, जिसे रेगुलेटर हर शॉट के लिए एक जैसे छोटे चार्ज तक घटा देता है
Morini अपनी 1992 की CM 162E को इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर वाली पहली 200-bar कंप्रेस्ड एयर पिस्टल बताती है। Steyr की LP10 2000 में आई और 2016 में उसकी जगह Evo 10 ने ली। Feinwerkbau ने P44 2006 से 2016 तक बनाई। Anschütz ने 2009 में मैच एयर पिस्टल बेचना बंद कर दिया। आज अंतरराष्ट्रीय फ़ायरिंग लाइन पर लगभग हर पिस्टल रेगुलेटेड PCP है। मुख्य निर्माता हैं Feinwerkbau और Walther (जर्मनी), Steyr (ऑस्ट्रिया), Morini (स्विट्ज़रलैंड) और Pardini (इटली)। हर सिस्टम कैसे काम करता है, यह आप स्प्रिंग, CO2, SSP, PCP में देखेंगे।
मिक्स्ड टीम, नए सिरे से
सबसे नया बदलाव मिक्स्ड टीम में है। पेरिस 2024 में पदक आमने-सामने के मैचों में तय हुए। हर जीता हुआ राउंड 2 अंक दिलाता था, और जो जोड़ी पहले 16 अंक तक पहुँचती, वह जीतती। 2026 से वह फ़ॉर्मेट खत्म हो गया है।
पहले सोचें: नया मिक्स्ड टीम फ़ाइनल चार टीमों की एक प्रतियोगिता है: हर खिलाड़ी के 24 शॉट, दशमलव स्कोरिंग, और शॉट 18 के बाद सबसे नीचे वाली टीम बाहर। पुराने फ़ॉर्मेट के मुकाबले यह किस बात का ज़्यादा इनाम देता है?
- एक विरोधी के खिलाफ़ अलग-अलग राउंड जीतना
- दोनों पार्टनरों का हर शॉट पर लगातार अच्छा स्कोर
- दूसरी टीम से तेज़ शूट करना
नई मिक्स्ड टीम का क्वालिफ़िकेशन भी छोटा है: 40 मिनट में हर खिलाड़ी के 30 शॉट, और टॉप 4 टीमें आगे जाती हैं। LA28 में यही फ़ॉर्मेट इस्तेमाल होगा।
- 1970 (पुरुष) और 1974 (महिला) से विश्व चैंपियनशिप में। सोल 1988 से ओलंपिक में।
- 1985 से फ़ाइनल। 2013 से हर फ़ाइनल शून्य से शुरू होता है।
- पावर सिस्टम का सफ़र: स्प्रिंग → CO2 → सिंगल-स्ट्रोक → रेगुलेटेड PCP। हर एक ने पिछले वाले की कमज़ोरी दूर की।
- मिक्स्ड टीम टोक्यो 2020 में ओलंपिक में आई। एक फ़ाइनल वाला नया फ़ॉर्मेट 2026 में आ रहा है और LA28 में इस्तेमाल होगा।