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साँस और हार्ट रेट

हर साँस आपकी छाती को हिलाती है, और छाती आपके कंधे, बाँह और पिस्टल को। तो इस सारी हलचल में शॉट कब छूटना चाहिए?

पहले सोचें: साँस के किस पल पर शॉट छूटना चाहिए?

  • पूरी साँस भरने के बाद, जब फेफड़े ठसाठस भरे हों
  • साँस का कुछ हिस्सा छोड़ने के बाद आने वाले स्वाभाविक ठहराव में
  • धीरे-धीरे साँस लेते और छोड़ते हुए
  • सारी हवा ज़ोर लगाकर बाहर निकालने के बाद

एक साँस, एक शॉट

शॉट के लिए साँस लेना एक छोटा, दोहराने लायक क्रम है। आप इसे हर शॉट पर करते हैं, इसलिए यह आपके रूटीन का हिस्सा बन जाता है।

  • पिस्टल नीचे रखकर 2–3 धीमी, गहरी साँसें लें। धीमी, ज़बरदस्ती नहीं: बहुत तेज़-तेज़ साँस (हाइपरवेंटिलेशन) न लें।
  • पिस्टल को टारगेट से थोड़ा ऊपर तक उठाते हुए साँस अंदर लें।
  • जब साइट नीचे आकर एमिंग एरिया में टिकने लगें, तब साँस का कुछ हिस्सा छोड़ें (लगभग ¼ से ½)।
  • स्वाभाविक ठहराव में निशाना लगाएँ और शॉट रिलीज़ करें।
  • फ़ॉलो-थ्रू (शॉट छूटने के बाद भी पोज़िशन और फ़ोकस बनाए रखना) करें, फिर साँस छोड़ें और पिस्टल नीचे करें।
एक शॉट का चक्र। छायांकित पट्टी स्वाभाविक ठहराव है: सिर्फ़ यही वह समय है जब शॉट छूटना चाहिए। एक्सपर्ट और नौसिखिए के दिल की धड़कन के पैटर्न के बीच बदलकर देखें।

शॉटों के बीच भी सोच-समझकर गहरी साँसें लेते रहें, पूरे 60 शॉट तक।

ठहराव की एक सीमा है

ठहराव कोई मुकाबला नहीं है। लगभग 8–10 सेकंड तक साँस रोकना व्यावहारिक सीमा है, और ऑक्सीजन कम होने पर सबसे पहले आपकी आँखों पर असर पड़ता है। अगर तब तक शॉट नहीं छूटा, तो पिस्टल नीचे करें, साँस लें, और चक्र फिर से शुरू करें। इस पर और जानकारी डॉमिनेंट आँख और फ़ोकस में है।

आपका दिल क्या करता है

शोधकर्ताओं ने हर शॉट से पहले के समय में निशानेबाज़ों का हार्ट रेट (दिल की धड़कन) सेकंड-दर-सेकंड रिकॉर्ड किया है।

पहले सोचें: शॉट से पहले के कुछ सेकंडों में एक्सपर्ट निशानेबाज़ों का दिल ऐसा क्या करता था जो नौसिखियों का नहीं करता था?

  • तेज़ धड़कता था, क्योंकि शॉट की ओर बढ़ते हुए एड्रेनालिन बढ़ता है
  • धीरे-धीरे धीमा होता था, और शॉट के बाद फिर तेज़ हो जाता था
  • कुछ नहीं: दोनों समूहों में हार्ट रेट एक जैसा रहा

एक पुराने और छोटे अध्ययन (नौ निशानेबाज़, 1987) में पाया गया कि चैंपियन अक्सर दो धड़कनों के बीच फ़ायर करते थे, जबकि शुरुआती निशानेबाज़ दिल के चक्र के किसी भी पल पर फ़ायर करते थे।

कोई भी धड़कनें गिनकर निशाना नहीं लगाता। इन नतीजों को नकल करने वाली तकनीक के बजाय एक शांत, मंझे हुए शॉट के संकेत के रूप में देखें। ऊपर दिया साँस का क्रम और एक स्थिर रूटीन, यही वे हिस्से हैं जिन पर आपका नियंत्रण है।

बीटा-ब्लॉकर, यानी दिल की धड़कन धीमी करने वाली दवाएँ, शूटिंग में प्रतियोगिता के दौरान और उसके बाहर, दोनों समय प्रतिबंधित हैं। अगर इलाज के लिए आपको इनकी ज़रूरत है, तो आपको TUE (इलाज के लिए इस्तेमाल की छूट) के लिए आवेदन करना होगा। देखें एंटी-डोपिंग की ज़रूरी बातें।

कुछ और चीज़ें भी आपका हार्ट रेट बढ़ाती हैं: शरीर में पानी की कमी, और ज़्यादा मात्रा में कैफ़ीन। एक अध्ययन में पाया गया कि शरीर के हर kg वज़न पर 5 mg कैफ़ीन से हार्ट रेट बढ़ा और स्कोर घटा। और जानकारी खाना, पानी, कैफ़ीन और नींद में है।

धीमी साँस की ट्रेनिंग

कुछ निशानेबाज़ हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV) बायोफ़ीडबैक से ट्रेनिंग करते हैं। मकसद है साँस की ऐसी रफ़्तार ढूँढना जिस पर दिल की लय हर साँस के साथ आराम से ऊपर-नीचे झूले।

पहले सोचें: यह ‘रेज़ोनेंस’ ब्रीदिंग लगभग प्रति मिनट कितनी साँसों की रफ़्तार पर चलती है?

छोटे अध्ययनों में रेज़ोनेंस ब्रीदिंग की ट्रेनिंग के बाद बेहतर स्कोर और तनाव के ज़्यादा शांत संकेत दर्ज हुए हैं। सबूत उम्मीद जगाने वाले हैं, पर अभी शुरुआती हैं। इसे एक प्रयोग की तरह लें, आज़माया हुआ पक्का इलाज नहीं।

  • 2–3 धीमी साँसें, उठाते हुए साँस अंदर, टिकते हुए ¼–½ बाहर, स्वाभाविक ठहराव में फ़ायर, फ़ॉलो-थ्रू के बाद साँस छोड़ें।
  • ठहराव ज़्यादा से ज़्यादा लगभग 8–10 s चलता है। सबसे पहले नज़र कमज़ोर पड़ती है। फिर पिस्टल नीचे करें और दोबारा शुरू करें।
  • एक्सपर्ट का दिल शॉट से पहले धीमा होता है और बाद में फिर तेज़ होता है। चैंपियन अक्सर दो धड़कनों के बीच फ़ायर करते थे।
  • शूटिंग में बीटा-ब्लॉकर प्रतियोगिता के दौरान और बाहर, दोनों समय प्रतिबंधित हैं।
  • रेज़ोनेंस ब्रीदिंग (~6/min) उम्मीद जगाती है, पर सबूत अभी शुरुआती हैं।

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